पर्यावरण में प्लास्टिक और पालीथीन एक अंतहीन समस्या नहीं





प्रदूषण हमारी धरा की एक व्यापक समस्या है। पर्यावरण में प्लास्टिक और पालीथीन की समस्या से निपटना अत्यंत ही कठिन कार्य के रुप में हमारे सामने दिख रहा है। प्रदूषण ने हमारे पर्यावरण को अत्यंत दूषित कर दिया है।




हमारा जीवन भी पर्यावरण के दूष्प्रभाव से अछुता नहीं है। उसने हमारे जीवन को तरह - तरह से प्रभावित किया है। जो हमारे जीवन के लिए बहुत हानिकारक सिद्ध हुआ है।






पर्यावरण एवं प्रकृति में प्लास्टिक और पालीथीन एक अंतहीन समस्या नहीं

पर्यावरण एवं प्रकृति में प्लास्टिक और पालीथीन एक अंतहीन समस्या नहीं





प्रदूषण हमारी धरा की प्रत्येक अमूल्य धरोहर को प्रदूषित कर रहा है। प्लास्टिक, पालीथीन, पानी की बोतलें, पालीथीन पैकिंग के पालीपैक
खाद्य पदार्थों के बढते उपयोग ने प्रदूषण की समस्या को और विकराल कर दिया है। लोकल ब्राण्डों से विकास एवं अर्थव्यवस्था को गति 



हमें तकनीक, सयंम और धैर्य से प्रदूषण की समस्या का डटकर सामना करना है। और अपनी धरा की समस्त अमूल्य धरोहरों को सहज कर रखना है। हम सबको मिलकर के प्रदूषण की इस समस्या को जड़ से समाप्त करना है।



तभी हम आने वाली पीड़ियों को साफ स्वच्छ पर्यावरण प्रदान कर पायेंगे। उनका आने वाला कल हम सुरक्षित दे पायेंगे। अत: पर्यावरण में प्लास्टिक और पालीथीन एक अंतहीन समस्या नहीं है।




प्राकृति में होने वाले अनावश्यक एवं आश्चर्यजनक परिवर्तन का मुख्य कारण पर्यावरण का अत्यंत प्रदूषित होना ही है।




हमें ऐसी नीतियां बनाने होंगी। जो हमारा पर्यावरण और धरा की अमूल्य धरोहरों को सदा के लिए सुरक्षित रख सकें। उनका पोषण कर सकें।
आर्टिकल 370 एवं 35A की समाप्ति

मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति वाली पावरफुल सरकार


हमें एक ऐसी विशेष नीति बनानी होगी। जिससे प्लास्टिक, पालीथीन पर्यावरण में जाये ही ना। यह मानव हाथ में आने के बाद, हाथ से ही स्टोर हो जाये।




पर्यावरण में प्लास्टिक और पालीथीन को जाने से रोकने के लिए उपभोक्ताओं से अतिरिक्त धरोहर मूल्य लिया जाना चाहिए।



और उस प्लास्टिक और पालीथीन को बिक्रेताओं एवं उत्पादकों के माध्यम से पहले से ली जा चुकी धरोहर राशि/मूल्य का उपभोक्ताओं को भुगतान करके वापस लेकर स्टोर कर लेना चाहिए।




उपभोक्ताओं से वापस ले लेकर स्टोर की गई, प्लास्टिक और पालीथीन को रिसाल हेतु इकट्ठा
कर फैक्टरियों एवं उत्पादकों पहुँच जानी चाहिए।



जिससे कि वह इकट्ठा की प्लास्टिक और पालीथीन को पुनः उपयोग के लिए बनाकर बाजार और उपभोक्ताओं तक पहुँच सके





अत: इस प्रकार से प्लास्टिक और पालीथीन को उपभोक्ताओं के माध्यम से इकट्ठा कराके। 
उसके बदले में मूल्य का भुगतान करके इसे पर्यावरण में पहुचने से प्रभावी रूप से रोका जा सकता है।




उपभोक्ताओं को प्लास्टिक और पालीथीन देते समय उनसे इसकी वापसी के लिए धरोहर राशि लेना। और बिक्रेताओं के द्वारा धरोहर राशि वापस करके प्लास्टिक और पालीथीन वापस ले लेना।





इसके पश्चात बिक्रेताओं द्वारा उपभोक्ताओं को वापस की गई धरोहर राशि को, बिक्रेताओं को वापस करके उत्पादकों को इसे वापस ले लेना चाहिए।





अत: पर्यावरण को साफ एवं स्वच्छ रखने की इस व्यवस्था में मुख्य रूप से तीन पिलर-  उपभोक्ता - बिक्रेता - उत्पादक हैं।



यह पर्यावरण को बचाने और साफ - स्वच्छ रखने की मुख्य तकनीक सिद्ध होगी। इस प्रकार से हम धीरे - धीरे प्लास्टिक और पालीथीन को पर्यावरण में जाने से रोकने में सफल होंगे।
बदलाव एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है, जो लगातार चलती ही रहती है। 



इस तकनीक को प्रभावी तरह से तैयार करके लागू करने से इसके अत्यंत ही सकारात्मक परिणाम आयेंगे। और समस्त विश्व के सामने एक कीर्तिमान स्थापित होगा।




साथ ही इस तकनीक का व्यापक प्रचार - प्रसार करके जन - जन तक पहुँचा के, उन्हें सजग और जागरुक करके। हम निश्चित रूप से इसे सिद्ध करने में सफल होंगे। साथ ही मजबूत राजनीतिक इच्छा शक्ति का होना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। 





इसके साथ ही हम सबको पर्यावरण और प्रकृति के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखना और पालन करना चाहिए। और प्रभावी रुप से प्लास्टिक और पालीथीन को पर्यावरण एवं प्राकृति में जाने से रोकना ही होगा।